नवादा विधान
सभा में किसानों की आय दोगुनी करने की रणनीति
एक स्थायी
कृषि विकास योजना
- नवादा की कृषि को विविधीकरण, तकनीक अपनाने, बाजार से जोड़ने और स्थायित्व के माध्यम से सशक्त बनाना।
- लक्ष्य: 5-7 वर्षों में किसानों की आय को
दोगुना करना।
नवादा कृषि की प्रमुख चुनौतियाँ
- पारंपरिक कम-मूल्य वाली फसलों (धान, गेहूं) पर निर्भरता।
- बाजार पहुंच की कमी और बिचौलियों पर निर्भरता।
- सीमित सिंचाई सुविधाएं और अनियमित वर्षा।
- भंडारण और प्रसंस्करण
अधोसंरचना की कमी के कारण कटाई के बाद नुकसान।
आय बढ़ाने की मुख्य रणनीतियाँ
- फसल विविधीकरण और उच्च-मूल्य
वाली खेती
- किसान उत्पादक संगठन (FPOs) को सशक्त बनाना
- डेयरी, मुर्गीपालन और पशुपालन को
बढ़ावा
- बेहतर सिंचाई और जल प्रबंधन
- फसल कटाई के बाद की अवसंरचना
और मूल्य संवर्धन
- डिजिटल कृषि और बाजार पहुंच
फसल विविधीकरण और उच्च-मूल्य वाली खेती
- लीची, केला, आम, ड्रैगन फ्रूट और मखाना को बढ़ावा देना।
- सब्जियों और औषधीय पौधों की
जैविक खेती का समर्थन।
- संरक्षित खेती (ग्रीनहाउस, पॉलीहाउस) को प्रोत्साहित करना।
- अपेक्षित प्रभाव: प्रति एकड़ आय में 30-50% वृद्धि।
किसान
उत्पादक संगठनों (FPOs) को सशक्त बनाना
- 2027 तक 10 नए FPOs का गठन।
- FPOs को कम-ब्याज ऋण और प्रशिक्षण प्रदान करना।
- ई-नाम और अनुबंध खेती के
माध्यम से सीधी बिक्री को सक्षम बनाना।
- अपेक्षित प्रभाव: बिक्री मूल्य में 15-20% की वृद्धि।
डेयरी और
पशुपालन को बढ़ावा
- 2 नए चिलिंग प्लांट के साथ सुधा डेयरी नेटवर्क का विस्तार।
- हाइब्रिड पशुओं की आपूर्ति और
75% चारा सब्सिडी।
- मुर्गीपालन और बकरी पालन
केंद्रों की स्थापना।
- अपेक्षित प्रभाव: डेयरी और पशुपालन में 30-50% आय वृद्धि।
सिंचाई और
जल प्रबंधन को सशक्त बनाना
- पीएम-कुसुम सौर सिंचाई योजना
का विस्तार।
- 10 नए चेक डैम और 50 पुनर्भरण कूपों का निर्माण।
- ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को प्रोत्साहित करना।
- अपेक्षित प्रभाव: उत्पादकता में 20% वृद्धि।
फसल कटाई के
बाद की अवसंरचना और मूल्य संवर्धन
- 3 कोल्ड स्टोरेज यूनिट और खाद्य
प्रसंस्करण संयंत्रों की स्थापना।
- मकई को स्टार्च, कॉर्नफ्लेक्स और पशु आहार में
प्रसंस्करण।
- मखाना प्रसंस्करण और शहद
पैकेजिंग इकाइयों की स्थापना।
- अपेक्षित प्रभाव: नुकसान में 30% की कमी और मुनाफे में 40% की वृद्धि।
डिजिटल कृषि
और बाजार पहुंच
- ई-नाम और ऑनलाइन व्यापार में 100% किसानों की भागीदारी।
- मौसम, कीट नियंत्रण और मूल्य
भविष्यवाणी के लिए AI आधारित सलाहकार सेवाएँ।
- नवादा के 200 गाँवों में डिजिटल केंद्रों
की स्थापना।
- अपेक्षित प्रभाव: बेहतर बाजार पहुंच, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता
कम होगी।
वित्तीय
आवश्यकताएँ और वित्त पोषण स्रोत
घटक |
अनुमानित लागत (₹ करोड़) |
वित्त पोषण स्रोत |
फसल
विविधीकरण |
50 |
पीएम कृषि
सिंचाई योजना, राज्य सरकार |
FPO सशक्तिकरण |
30 |
नाबार्ड, निजी निवेश |
डेयरी और
पशुपालन |
40 |
राष्ट्रीय
गोकुल मिशन,
COMPFED |
सिंचाई और
जल प्रबंधन |
100 |
पीएम-कुसुम, जल जीवन हरियाली |
कोल्ड
स्टोरेज और प्रसंस्करण |
80 |
मेगा फूड
पार्क, निजी क्षेत्र |
डिजिटल
कृषि |
20 |
ई-नाम, एग्री-टेक स्टार्टअप्स |
कुल |
₹320 करोड़ |
सरकारी +
निजी + NGO |
2030 तक अपेक्षित प्रभाव
संकेतक |
वर्तमान
स्थिति |
लक्ष्य |
वार्षिक
औसत किसान आय |
₹70,000 |
₹1,50,000+ |
सक्रिय FPOs |
4 |
15+ |
कोल्ड
स्टोरेज यूनिट |
1 |
3 |
पोल्ट्री
फार्म |
5 |
25 |
बाजार
पहुंच (ई-नाम, डिजिटल) |
10% किसान |
75% किसान |
सिंचाई
कवरेज |
55% |
85% |
निष्कर्ष और
आगे की राह
- कृषि, पशुपालन और तकनीक का एकीकृत
दृष्टिकोण।
- वित्तपोषण और नवाचार के लिए
सार्वजनिक-निजी भागीदारी।
- सरकारी और NGO समर्थन से मजबूत संस्थागत
ढांचा।
- किसानों के लिए निरंतर
प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम।
- लक्ष्य: नवादा में एक समृद्ध
ग्रामीण अर्थव्यवस्था की स्थापना!